केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की यूरोपीय देशों को चेतावनी, कहा- ‘सीबीएएम’ और भारी आयात शुल्क से बढ़ेगा रहने का खर्च
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और स्टील पर भारी आयात शुल्क लगाने से वहां रहने का खर्च बढ़ेगा, उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता घटेगी और अंततः उपभोक्ताओं को नुकसान होगा। ‘बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026’ में एक सत्र के दौरान गोयल ने दोटूक कहा कि यदि यूरोपीय देश खुद पर सीबीएएम लागू करते हैं और आयातित स्टील पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाते हैं, तो वे खुद एक बड़ी मुसीबत को न्योता दे रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में व्यापार के लिए ‘भरोसा’ सबसे बड़ी पूंजी है।
भारत-जर्मनी व्यापार में भारी संभावना
बर्लिन में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा कि यदि भारत और जर्मनी एक-दूसरे की ताकतों का लाभ उठाते हुए मिलकर उत्पाद और तकनीक विकसित करें, तो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा 31 अरब यूरो से बढ़कर 310 अरब यूरो के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है। गौरतलब है कि मंत्री गोयल 22 से 27 अक्टूबर तक जर्मनी और नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां उनके साथ लगभग 100 भारतीय व्यवसायों और स्टार्टअप्स का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है।
भारत-ईयू एफटीए इस साल के अंत तक संभव
जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे ने नौकरशाही की अड़चनों को कम करने और संयुक्त परियोजनाएं शुरू करने पर जोर दिया। ‘इंडिया-जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल’ को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं और यह अगले चार से पांच महीनों में प्रभावी हो जाएगा।
दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा भंडारण और मजबूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। गोयल ने इसे दोनों देशों के व्यवसायों के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ करार दिया।