October 24, 2026

भारत में बिजनेस एक्टिविटी 4 महीने के उच्चतम स्तर पर: अक्टूबर में फ्लैश PMI बढ़कर 56.7 हुआ

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मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर की बदौलत आर्थिक विस्तार में आई तेजी

मजबूत घरेलू मांग, फेस्टिव सीजन की खरीदारी और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विसेज दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के दम पर अक्टूबर 2026 में भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

HSBC द्वारा जारी और S&P ग्लोबल द्वारा संकलित फ्लैश सर्वे डेटा के अनुसार, भारत का फ्लैश कम्पोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अक्टूबर में बढ़कर 56.7 हो गया, जो सितंबर में 55.9 था। 50 से ऊपर का PMI अंक कारोबार में विस्तार (Expansion) को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का अंक गिरावट का संकेत देता है।

अक्टूबर बिजनेस एक्टिविटी की मुख्य बातें

  • ओवरऑल एक्टिविटी: कम्पोजिट PMI बढ़कर 56.7 पर पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों की तुलना में आर्थिक गति में आए सुधार को दर्शाता है।

  • मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट: नए ऑर्डर, घरेलू बिक्री और त्योहारी सीजन से पहले उत्पादन क्षमता बढ़ने के कारण फैक्ट्री गतिविधियों में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • सर्विसेज सेक्टर: ग्राहकों की मांग, कॉरपोरेट ट्रैवल और डिजिटल सेवाओं की खपत बढ़ने से सर्विस सेक्टर इंडेक्स में भी तेजी देखी गई।

  • नए ऑर्डर और एक्सपोर्ट डिमांड: नए बिजनेस में बढ़ोतरी की रफ्तार तेज हुई, जिसे मुख्य रूप से घरेलू ग्राहकों का समर्थन मिला। अंतरराष्ट्रीय मांग सकारात्मक बनी रही, हालांकि वैश्विक स्थितियों के कारण निर्यात ऑर्डर में मामूली सुस्ती दर्ज की गई।

  • रोजगार की स्थिति: उत्पादन में तेजी के बावजूद नौकरियों के नए अवसरों का सृजन सीमित रहा। अधिकांश कंपनियों ने आक्रामक भर्ती के बजाय मौजूदा कर्मचारियों के जरिए काम का बोझ संभाला।

  • महंगाई का दबाव: कच्चे माल और मजदूरी की लागत में मामूली वृद्धि हुई, लेकिन इनपुट कॉस्ट का दबाव नियंत्रण में रहने से कंपनियों को अपनी कीमतें सीमित रखने में मदद मिली।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अक्टूबर के आंकड़े त्योहारी सीजन से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। घरेलू खपत, बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च और सर्विस सेक्टर की स्थिरता वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को मजबूत सहारा दे रही है।

कारोबारी गतिविधियों में लगातार तेजी से यह उम्मीद मजबूत हुई है कि भारत चालू वित्त वर्ष में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।

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