October 25, 2026

यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बना भारत; रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर

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यूरोपीय संघ (EU) की ‘रीआर्म यूरोप’ (ReArm Europe) पहल के तहत रक्षा उपकरणों की बढ़ती मांग और देश के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के बल पर भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कल मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये (लगभग 3.6 अरब यूरो) के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-time high) पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यूरोप को निर्यात में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से मानक गोला-बारूद, तोप के गोलों (Artillery Shells) और अन्य बड़े तथा छोटे कैलिबर के गोला-बारूद की बढ़ती मांग के कारण हुई है।

रक्षा सचिव ने बताया कि पिछले एक दशक में देश के रक्षा विनिर्माण तंत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 16 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, लगभग 840 बड़ी और मध्यम आकार की निजी उद्यम और स्टार्ट-अप सहित लगभग 17,000 छोटी इकाइयां शामिल हैं। उन्होंने आगे जोड़ा कि भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। भारत के रक्षा निर्यात में तोपखाने और गोला-बारूद से लेकर छोटे हथियार, हेलमेट, बुलेटप्रूफ जैकेट और अन्य सामरिक (Tactical) उपकरण शामिल हैं।

श्री सिंह ने रेखांकित किया कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वार्षिक रक्षा पूंजीगत व्यय (अनुमानित 20 से 25 अरब डॉलर) का 75 प्रतिशत हिस्सा घरेलू स्तर पर खर्च किया जाए, जिसमें भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित (IDDM) उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय रक्षा निर्माता अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) के देशों को आकर्षित कर रहे हैं, जो छोटे हथियारों, कलपुर्जों और आर्टिलरी गन सिस्टम सहित रक्षा उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला में रुचि दिखा रहे हैं।

रक्षा सचिव ने कहा कि भारत यूरोपीय भागीदारों के साथ संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) के माध्यम से यूरोपीय रक्षा खरीद में अपनी भागीदारी का विस्तार करने की योजना बना रहा है, साथ ही यूरोपीय कंपनियों को ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। भारतीय और यूरोपीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं के बेहतर एकीकरण से अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने और आपसी सहयोग को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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