ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: ऊर्जा सुरक्षा को विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूत नींव बताया
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने ऊर्जा सुरक्षा को सामाजिक-आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया। नेताओं ने ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने, विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान आगाह किया कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारीकरण वैश्विक प्रगति में बाधा बन सकता है। उन्होंने ऊर्जा, तकनीक और महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षित एवं स्थिर आपूर्ति के महत्व को रेखांकित किया।
भारत ने ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ विषय के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। भारत की अध्यक्षता में लोगों पर केंद्रित विकास और वैश्विक दक्षिण के हितों को प्राथमिकता दी गई।
नई दिल्ली घोषणा में साझा रुख
सम्मेलन का प्रमुख परिणाम ‘नई दिल्ली घोषणा’ को अपनाया जाना रहा। इसमें प्रमुख भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर सदस्य देशों का साझा रुख सामने आया। पश्चिम एशिया की स्थिति पर ब्रिक्स नेताओं ने अधिकतम संयम बरतने, संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने तथा नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
संक्रामक रोगों से निपटने पर सहमति
शिखर सम्मेलन में संक्रामक रोगों की रोकथाम और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ विकसित करने पर भी सहमति बनी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद, स्वास्थ्य, वैश्विक स्थिरता और विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों ने साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।